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रक्षाबंधन

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प्रस्तावना:- रक्षाबंधन  हिन्दुओं का प्रमुख पर्व है। यह त्योहार भाई-बहन के पवित्र प्रेम का प्रतीक है।यह त्यौहार श्रावण मास की पूर्णिमा को बडी धूमधाम से मनाया जाता है इसेे सभीी धर्म के लोग  मनाते हैं इसकी विषेश महत्व यह कि             रक्षाबंधन पर बहन, भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसकी लम्बी उम्र व सुखी जीवन की मंगलकामना करती है बदले में भाई भी बहन की रक्षा का वचन देता है लेकिन अगर सोचे तो क्या वास्तव में बहन-भाई की रक्षा होती है ? कई बहने अपना भाई खो देती है तो कैसे रक्षा हो उनकी व उनके परिवार की।  अतः वास्तव में रक्षा करने वाला तो पूर्ण परमात्मा ही है जो वास्तव में हमारा रक्षक है जिससे लाभ लेने के लिए पूर्ण गुरु से नाम उपदेष लेकर उसकी भक्ति करने से ही हमारी रक्षा हो सकती है अतः उसकी भक्ति रूपी रक्षाबंधन   मनाने से अर्थात उसकी भक्ति करने से ही मानव को सुख व मोक्ष की प्राप्ति हो सकती है और जीवन भर पल पल रक्षा भी। अधिक जानकारी के लिए देखिए संत रामपाल जी महाराज के मंगल प्रवचन  साधना चैनल पर शाम 7.3...

रक्षाबंधन

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रक्षाबंधन_विशेष            रक्षाबंधन विशेष पर्व माना जाता हैं। रक्षाबंधन एक धागा हैं। बहन अौर भाई कें प्रेम का जहाँ भाई बहन को उसकी रक्षा का वचन देता हैं। कि मैं जीवन तक सदा तेरी सहायता करुंगा। पर ये कहाँ तक संभव हैं। जिन में जितनी बुद्धि हैं,तितनो देत बताय। बाको बुरा ना मानियो,अौर कहाँ से लाय।। हर साल कितने हीं भाई मृत्यु को प्राप्त होते हैं। एक दुसरे कि रक्षा करने का वचन देने के वाद भी। यदि बहन के भाई को बांधे गए धागे में इतनी शक्ति होती तो किसी माँ की कोख ना उजडती। यदि  धागे में इतना शक्ति होती तो किसी भाई कि बाईक  एक्सीडेंन मे मौत ना होती। यदि भाइ बहन की रक्षा करनेका वचन भरता हैं। तो उस समय वो भाई होता हैं। जब उसकी या किसी अौर कि बहन की  इज्जत को कोई भेडिया लुट रहा होता हैं। उस बहनों की ये हालत ना होती। यदि भाई के वचन में इतनी ताकत होती हैं। तो बहन की  विधवा होने से क्यों नहीं बचा पाता वो भाई ?? भाई कि कलाई पे बांधे धागे इतनी शक्ति होती तो बोडर  पर लड रहे सैनिकको सहिद न होना पडता। रक्षा केवल प...

असली जगन्नाथ कौन है

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प्रस्तावना:- उड़ीसा प्रांत में एक इन्द्र दमन नाम का राजा था। वह भगवान श्री कृष्ण जी का अनन्य भक्त था। एक रात को श्री कृष्ण जी ने राजा को स्वपन में दर्शन देकर कहा कि जगन्नाथ नाम से मेरा एक मन्दिर बनवा दे। श्री कृष्ण जी ने यह भी कहा था कि इस मन्दिर में मूर्ति पूजा नहीं करनी है। केवल एक संत छोड़ना है जो दर्शकों को पवित्र गीता जी के अनुसार ज्ञान प्रचार करे। समुद्र तट पर वह स्थान भी दिखाया जहाँ मन्दिर बनाना था। सुबह उठकर राजा इन्द्र दमन ने अपनी पत्नी को बताया कि आज रात्रि को भगवान श्री कृष्ण जी दिखाई दिए। मन्दिर बनवाने के लिए कहा है। रानी ने कहा शुभ कार्य में देरी क्यों ? सर्व सम्पत्ति उन्हीं की दी हुई है। उन्हीं को समर्पित करने में क्या सोचना है? राजा ने उस स्थान पर मन्दिर बनवा दिया जो श्री कृष्ण जी ने स्वपन में समुद्र के किनारे पर दिखाया था। मन्दिर बनने के बाद समुद्री तुफान उठा, मन्दिर को तोड़ दिया। निशान भी नहीं बचा कि यहाँ मन्दिर था। ऐसे राजा ने पाँच बार मन्दिर बनवाया। पाँचों बार समुद्र ने तोड़ दिया। राजा ने निराश होकर मन्दिर न बनवाने का निर्णय ले लिया। यह सोचा कि न जाने समु...

श्री कृष्ण जन्माष्टमी

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भारत में अनेक त्यौहार मनाये जाते हैं जैसे महाशिवरात्रि, होली, दीपावली, रक्षाबंधन इत्यादि कृष्ण जन्माष्टमी भारत का प्रमुख त्यौहार है ।यह शुभ दिन भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी को रात्रिकालीन में सतोगुण विष्णु जी के 8वाँ अवतार कृष्ण रूप में  माता देवकी के गर्भ राजा कंश की जेल में हुआ । श्री कृृष्ण जी ने अपने जीवन काल में अनेक लीलायैं की जैसे पूूतना वध, वकासुुुर वध, काली दह में कालििया  नाग का वध करना तथा कंश वध इत्यादि अनेक लीलायैं की उन्होंने अपने जीवन काल में जो लीलायैं की उनसे लोग उन्हें पूर्ण परमात्मा मानते हैं ।लेकिन ऐसा कहना सही नहीं है क्योंकि पूर्ण परमात्मा कभी माँ के गर्भ से जन्म नहीं लेता है ।और नाही वो स्तनपान करते हैं जवकि श्री कृष्ण ने माता देवकी के गर्भ से जन्म लेकर उनका दूध पीया लेकिन पूर्ण परमात्मा की परवरिश कुंवारी गाय के दूध से होती है  श्री कृष्ण जी भगवान तो थे लेेेकि न तीन लोक के थे परन्तु कृष्ण से ऊपर एक सर्वोच्च शक्ति है ।जो असंंअसंख ब्रम्हाण्ड के सिरजनहार हैं वह अविनाशी पूर्ण परमात्मा आज से 600वर्ष पहले सन 1398 में का...

पूर्ण संत की पहचान

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ूर्ण परमात्मा कविर अर्थात् कबीर मानव शरीर में गुरु रूप में प्रकट होकर प्रभु प्रेमीयों को तीन नाम का जाप देकर सत्य भक्ति कराता है तथा उस मित्रा भक्त को पवित्राकरके अपने आशीर्वाद से पूर्ण परमात्मा अर्थात् अपनी प्राप्ति का मार्ग बताकर पूर्ण सुख प्राप्त कराता है। साधक की आयु बढाता है। यही प्रमाण गीता अध्याय 17 श्लोक 23 में है कि ओम्-तत्-सत् इति निर्देशः ब्रह्मणः त्रिविद्य स्मृतः भावार्थ है कि पूर्ण परमात्मा को प्राप्त करने का ¬ (1) तत् (2) सत् (3) यह मन्त्रा जाप स्मरण करने का निर्देश है। इस नाम को तत्वदर्शी संत से प्राप्त करो। तत्वदर्शी संत के विषय में गीता अध्याय 4 श्लोक नं. 34 में कहा है तथा गीता अध्याय नं. 15 श्लोक नं. 1 व 4 में तत्वदर्शी सन्त की पहचान बताई तथा कहा है कि तत्वदर्शी सन्त से तत्वज्ञान जानकर उसके पश्चात् उस परमपद परमेश्वर की खोज करनी चाहिए। जहां जाने के पश्चात् साधक लौट कर संसार में नहीं आते अर्थात् पूर्ण मुक्त हो जाते हैं। उसी पूर्ण परमात्मा से संसार की रचना हुई है। अधिक जानकारी केलिए देेखें संंत रामपाल जी महाराज के मंगल प्रव...

कबीर साहेव के चमत्कार

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प्रस्तावना  कबीर परमेश्वर आज से 600वर्ष पहले सन 1398 मैं काशी नगर में लहर तारा तालाव पर ब्रम्ह मुहूर्त में कमल के फूल पर प्रकट हुए  परमेश्वर की लीला अनुसार एक निसंतान दम्पति नीरू और नीमा वहाँ से बालक रूप में कबीर साहेव को अपने घर ले गये और वहां पर अपनी लीला अनुसार बडे हुये ।तभी 5वर्ष की उम्र में ही अनेकों चमत्कार और शास्त्रार्थ किये जिनमें सभी मुस्लिम एवं हिन्दू धर्म गुरुओं को परास्त करके अपनी समर्थता का परिचय दिया तथा अपना तत्व ज्ञान देकर अपनी शरण में लिया। कबीर परमेश्वर ने बालक रूप में ही अनेकों लीलायैं की कबीर साहेव द्वारा रामानंद जी को शरण में लेना । स्वामी रामानंद जी 104 वर्ष के बैष्णो उपासक थे।कबीर साहेव जी ने उनको अपना गुरु बनाया। वैसे कबीर साहेव को कोई गुरु बनाने की आवश्यकता नहीं थी क्योकि वे अनंत ब्रम्हाण्ड के स्वामी हैं लेकिन गुरु शिष्य बाली मर्यादा निभानी पडी ।तव कबीर साहेव ने शास्त्र अनुकूल साधना का ज्ञान दिया और  अपना तत्व ज्ञान देकर सतलोक दिखाया तब उन्होंने यह वाणी बोली  दोऊ ठौर एक तू भया एक से दो ।गरीब दास हम कारण आये हो मग जो...

समर्थ परमात्मा

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#Miracles_Of_GodKabir ऋग्वेद मण्डल 10 सुक्त 161 मंत्र 2,5, सुक्त 162 मंत्र 5, सुक्त 163 मंत्र 1 - 3 में प्रमाण मिलता है कि पूर्ण परमात्मा आयु बढ़ा सकता है और कोई भी रोग को नष्ट कर सकता है।  उसी विधान अनुसार कबीर परमेश्वर ने कमाल, कमाली नाम के मुर्दों को जीवित किया था। और दिल्ली के बादशाह सिकंदर के दरवार में गाय को जीवित किया तथा मनिहार सेऊ को जीवन दान दिया ।