ऋग्वेद मण्डल 10 सुक्त 161 मंत्र 2,5, सुक्त 162 मंत्र 5, सुक्त 163 मंत्र 1 - 3 में प्रमाण मिलता है कि पूर्ण परमात्मा आयु बढ़ा सकता है और कोई भी रोग को नष्ट कर सकता है।
उसी विधान अनुसार कबीर परमेश्वर ने कमाल, कमाली नाम के मुर्दों को जीवित किया था। और दिल्ली के बादशाह सिकंदर के दरवार में गाय को जीवित किया तथा मनिहार सेऊ को जीवन दान दिया ।
भारत में अनेक त्यौहार मनाये जाते हैं जैसे महाशिवरात्रि, होली, दीपावली, रक्षाबंधन इत्यादि कृष्ण जन्माष्टमी भारत का प्रमुख त्यौहार है ।यह शुभ दिन भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी को रात्रिकालीन में सतोगुण विष्णु जी के 8वाँ अवतार कृष्ण रूप में माता देवकी के गर्भ राजा कंश की जेल में हुआ । श्री कृृष्ण जी ने अपने जीवन काल में अनेक लीलायैं की जैसे पूूतना वध, वकासुुुर वध, काली दह में कालििया नाग का वध करना तथा कंश वध इत्यादि अनेक लीलायैं की उन्होंने अपने जीवन काल में जो लीलायैं की उनसे लोग उन्हें पूर्ण परमात्मा मानते हैं ।लेकिन ऐसा कहना सही नहीं है क्योंकि पूर्ण परमात्मा कभी माँ के गर्भ से जन्म नहीं लेता है ।और नाही वो स्तनपान करते हैं जवकि श्री कृष्ण ने माता देवकी के गर्भ से जन्म लेकर उनका दूध पीया लेकिन पूर्ण परमात्मा की परवरिश कुंवारी गाय के दूध से होती है श्री कृष्ण जी भगवान तो थे लेेेकि न तीन लोक के थे परन्तु कृष्ण से ऊपर एक सर्वोच्च शक्ति है ।जो असंंअसंख ब्रम्हाण्ड के सिरजनहार हैं वह अविनाशी पूर्ण परमात्मा आज से 600वर्ष पहले सन 1398 में का...
प्रस्तावना:- रक्षाबंधन हिन्दुओं का प्रमुख पर्व है। यह त्योहार भाई-बहन के पवित्र प्रेम का प्रतीक है।यह त्यौहार श्रावण मास की पूर्णिमा को बडी धूमधाम से मनाया जाता है इसेे सभीी धर्म के लोग मनाते हैं इसकी विषेश महत्व यह कि रक्षाबंधन पर बहन, भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसकी लम्बी उम्र व सुखी जीवन की मंगलकामना करती है बदले में भाई भी बहन की रक्षा का वचन देता है लेकिन अगर सोचे तो क्या वास्तव में बहन-भाई की रक्षा होती है ? कई बहने अपना भाई खो देती है तो कैसे रक्षा हो उनकी व उनके परिवार की। अतः वास्तव में रक्षा करने वाला तो पूर्ण परमात्मा ही है जो वास्तव में हमारा रक्षक है जिससे लाभ लेने के लिए पूर्ण गुरु से नाम उपदेष लेकर उसकी भक्ति करने से ही हमारी रक्षा हो सकती है अतः उसकी भक्ति रूपी रक्षाबंधन मनाने से अर्थात उसकी भक्ति करने से ही मानव को सुख व मोक्ष की प्राप्ति हो सकती है और जीवन भर पल पल रक्षा भी। अधिक जानकारी के लिए देखिए संत रामपाल जी महाराज के मंगल प्रवचन साधना चैनल पर शाम 7.3...
प्रस्तावना कबीर परमेश्वर आज से 600वर्ष पहले सन 1398 मैं काशी नगर में लहर तारा तालाव पर ब्रम्ह मुहूर्त में कमल के फूल पर प्रकट हुए परमेश्वर की लीला अनुसार एक निसंतान दम्पति नीरू और नीमा वहाँ से बालक रूप में कबीर साहेव को अपने घर ले गये और वहां पर अपनी लीला अनुसार बडे हुये ।तभी 5वर्ष की उम्र में ही अनेकों चमत्कार और शास्त्रार्थ किये जिनमें सभी मुस्लिम एवं हिन्दू धर्म गुरुओं को परास्त करके अपनी समर्थता का परिचय दिया तथा अपना तत्व ज्ञान देकर अपनी शरण में लिया। कबीर परमेश्वर ने बालक रूप में ही अनेकों लीलायैं की कबीर साहेव द्वारा रामानंद जी को शरण में लेना । स्वामी रामानंद जी 104 वर्ष के बैष्णो उपासक थे।कबीर साहेव जी ने उनको अपना गुरु बनाया। वैसे कबीर साहेव को कोई गुरु बनाने की आवश्यकता नहीं थी क्योकि वे अनंत ब्रम्हाण्ड के स्वामी हैं लेकिन गुरु शिष्य बाली मर्यादा निभानी पडी ।तव कबीर साहेव ने शास्त्र अनुकूल साधना का ज्ञान दिया और अपना तत्व ज्ञान देकर सतलोक दिखाया तब उन्होंने यह वाणी बोली दोऊ ठौर एक तू भया एक से दो ।गरीब दास हम कारण आये हो मग जो...
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