कबीर साहेव के चमत्कार

प्रस्तावना 
कबीर परमेश्वर आज से 600वर्ष पहले सन 1398 मैं काशी नगर में लहर तारा तालाव पर ब्रम्ह मुहूर्त में कमल के फूल पर प्रकट हुए 
परमेश्वर की लीला अनुसार एक निसंतान दम्पति नीरू और नीमा वहाँ से बालक रूप में कबीर साहेव को अपने घर ले गये और वहां पर अपनी लीला अनुसार बडे हुये ।तभी 5वर्ष की उम्र में ही अनेकों चमत्कार और शास्त्रार्थ किये जिनमें सभी मुस्लिम एवं हिन्दू धर्म गुरुओं को परास्त करके अपनी समर्थता का परिचय दिया तथा अपना तत्व ज्ञान देकर अपनी शरण में लिया।
कबीर परमेश्वर ने बालक रूप में ही अनेकों लीलायैं कीकबीर साहेव द्वारा रामानंद जी को शरण में लेना ।
स्वामी रामानंद जी 104 वर्ष के बैष्णो उपासक थे।कबीर साहेव जी ने उनको अपना गुरु बनाया। वैसे कबीर साहेव को कोई गुरु बनाने की आवश्यकता नहीं थी क्योकि वे अनंत ब्रम्हाण्ड के स्वामी हैं लेकिन गुरु शिष्य बाली मर्यादा निभानी पडी ।तव कबीर साहेव ने शास्त्र अनुकूल साधना का ज्ञान दिया और  अपना तत्व ज्ञान देकर सतलोक दिखाया तब उन्होंने यह वाणी बोली 
दोऊ ठौर एक तू भया एक से दो ।गरीब दास हम कारण आये हो मग जो 
बोलत रामानंद जी सुनो कबीर करतार ।
गरीब दास हर रूप में तुमही बोलन हार।।
"सिकंदर लोधी के रोग को ठीक करन।:-
सिकंदर लोधी बादशाहके जलनका असाध्य रोग था तब राजा वीरसिंह के कहने पर कबीर साहेव के पास काशी नगर में आया और किसी कारण वश स्वामी  रामानंद जी का कत्ल कर दिया ।तब कबीर साहेव ने अपने आशीर्वाद से राजा के जलन के रोग को ठीक करके अपने गुरूदेव स्वामी रामानंद जी को भी जीवित कर दिया था जिससे राजा बडा प्रभावित हुआ और अपने साथ दिल्ली आने की प्रार्थना की ।
कबीर परमेश्वर सिकंदर लोधी के साथ दिल्ली आकर अनेक लीलायैं की जैसे कमाल, कमाली जोकि मृत थे उनको जीवित करना ।आदि ।अधिक जानकारी के लिए देखें साधना tv पर संत रामपाल जी महाराज के मंगल प्रवचन साधना tv पर रोजाना साांय 7:30 बजे और पढै धार्मिक पुस्तक ज्ञान गंगा ,जीने की राह 
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