पूर्ण संत की पहचान
ूर्ण परमात्मा कविर अर्थात् कबीर
मानव शरीर में गुरु रूप में प्रकट होकर प्रभु प्रेमीयों को तीन नाम का जाप देकर सत्य
भक्ति कराता है तथा उस मित्रा भक्त को पवित्राकरके अपने आशीर्वाद से पूर्ण परमात्मा
अर्थात् अपनी प्राप्ति का मार्ग बताकर पूर्ण सुख प्राप्त कराता है। साधक की आयु
बढाता है। यही प्रमाण गीता अध्याय 17 श्लोक 23 में है कि ओम्-तत्-सत् इति निर्देशः
ब्रह्मणः त्रिविद्य स्मृतः भावार्थ है कि पूर्ण परमात्मा को प्राप्त करने का ¬ (1) तत् (2)
सत् (3) यह मन्त्रा जाप स्मरण करने का निर्देश है। इस नाम को तत्वदर्शी संत से
प्राप्त करो। तत्वदर्शी संत के विषय में गीता अध्याय 4 श्लोक नं. 34 में कहा है तथा
गीता अध्याय नं. 15 श्लोक नं. 1 व 4 में तत्वदर्शी सन्त की पहचान बताई तथा कहा
है कि तत्वदर्शी सन्त से तत्वज्ञान जानकर उसके पश्चात् उस परमपद परमेश्वर की
खोज करनी चाहिए। जहां जाने के पश्चात् साधक लौट कर संसार में नहीं आते
अर्थात् पूर्ण मुक्त हो जाते हैं। उसी पूर्ण परमात्मा से संसार की रचना हुई है।
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