तम्बाकू सेवन करना महपाप है ।
तमा +खू =तमाखू
खू नाम खून का तमा नाम गाय।सौ बार सौगन्ध इसे पीयै न खाय।।
अर्थ =फारसी भाषा में "तमा" गाय को कहते हैं खू =खून यानि रक्त को कहते हैं यह तमाखू गाय के रक्त से उपजा है इसके ऊपर गाय के बाल जैसे रौंये होते हैं संत गरीब दास जी महाराज समझाते हैं कि हे जीवात्मा तेरे को सौ बार सौगन्ध है इसका सेवन करना महपाप है तमाखू का सेवन करना गाय का खून पीने के समान पाप लगता है जब मुसलमान धर्म के व्यक्तियों को पता चला कि तमाखू गाय के रक्त से उपजा है तो उन्होंने तमाखू का सेवन (खाना हुक्का बनाकर पीना)शुरू कर दिया भोले हिन्दुऔ ने उनकी चाल नहीं समझी और उनके कहने पर तमाखू का सेवन जोर शोर से शुरू कर दिया और वर्तमान में तो यह पंचायत का प्याला बन गया जो भारी भूल है ।और अनगिनत पाप इकट्ठा करने लगे इसके बारे में
संत गरीब दास जी महाराज ने समझाया है ।कि
गरीब परद्वारा स्त्री का खोलै।सत्तर जन्म अन्धा हो डोले ।। 1
मदिरा पीवै कडवा पानी ।सत्तर जन्म श्वान के जानी ।। 2
सुरा पान मद मांसाहारी ।गवन करै भोगै पर नारी ।3
सत्तर जन्म कटेंगे शीशं।साक्षी साहिव है जगदीशं।।4
उपरोक्त जो चार वाणियों का जितना पाप बताया है वह पाप एक चिलम हुक्का भरने मात्र से लगता है ।
सौ नारी जारी करै सुरा पान सौ बार।
एक चिलम हुक्का भरै डूवै काली धार ।।5
हुक्का हरदम पीवते लाल मिलावे धूर ।
इसमें संशय है नहीं जन्म पिछले सूअर ।।6
संत गरीब दास जी महाराज कहते हैं कि
हे मानव इस अनमोल जन्म को व्यर्थ न गवा यह जन्म तेरे को शास्त्र अनुकूल भगती करने को मिला है तथा पूर्ण संत रामपाल जी महाराज से नाम दीक्षा लेकर इस जीवात्मा का चौरासी के चक्कर से पीछा छुडवा और और सतगुरु की शरण ग्रहण कर मोक्षमार्ग प्रशस्त कर।
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