चारों युगौं में आते हैं कबीर साहेव
के लिए आते हैं ।और अपने तत्व से समाज में फैली बुराइयों तथा कुरीतियों का सफाया कर शास्त्र अनुकूल साधना देकर जीव को सुख देकर मोक्ष प्रदान करते हैं ।
कबीर साहेव की वाणी है
सतयुग में सतसुकृत कह टेरा त्रेता नाम मुनीन्द्र मेरा ।
द्वापुर में करूणामय कहाया कलयुग नाम कबीर धराया ।।
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